🗓️ निर्णय तिथि: 20 जुलाई 2025
⚖️ केस: Jaykishor Chaturvedi & Ors. बनाम SEBI, Civil Appeal No. 1551–1553/2023
🧑⚖️ बेंच: जस्टिस जे. बी. परदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन
📌 क्या है मामला?
2014 में Brijlaxmi Leasing & Finance Ltd. के प्रमोटर-डायरेक्टर्स ने SEBI द्वारा निष्पादन आदेश (adjudication order) के तहत दंडित किए गए, लेकिन 45 दिनों के भीतर पेनल्टी का भुगतान नहीं किया। बावजूद इसके, SEBI ने 2022 में 12% वार्षिक ब्याज के साथ राशि वसूलने के लिए बैंकों से अटैचमेंट नोटिस जारी किए। अभियुक्तों ने चुनौती दी कि ब्याज तभी देना चाहिए, जब SEBI अलग से मांग नोटिस जारी करे।
🔍 मुख्य विषय: ‘ब्याज देयता की शुरुआत कब होती है?’
✅ सुप्रीम कोर्ट का स्पष्टीकरण:
- Adjudication Order = Demand Notice
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब आदेश में भुगतान अवधि (यहाँ 45 दिन) निर्धारित हो, तो वह कानूनी रूप से मांग नोटिस के समान होता है। अतः अलग से नोटिस जारी करना आवश्यक नहीं है। - ब्याज की देयता ‘स्वयं-ब-स्वयं’ शुरू
कानून के तहत, यदि अवधि समाप्त होने के बाद भुगतान नहीं होता, तो ब्याज देय हो जाता है। इसमें किसी अतिरिक्त कार्रवाई की आवश्यकता नहीं होती। - धारा 28A & Sec 220 IT Act–Ka interplay
SEBI एक्ट में Sec 28A द्वारा आयकर अधिनियम की Sec 220–227 को अपनाया गया है। Explanation–4 के अनुसार ब्याज उस दिन से लगाए जा सकते हैं जब देयता शुरू होती है। यह स्पष्ट रूप से विवेचित किया गया कि ये रेगुलेशन पूर्वकालीन रूप से भी लागू होंगे 🕰️ - Compensatory Interest, Not Penal
कोर्ट ने यह भी कहा कि यह ब्याज दंडात्मक नहीं, बल्कि शासकीय निधियों को समय पर प्राप्त न होने के कारण होने वाले नुकसान की पूर्ति के लिए है।
🗝️ निष्कर्ष और कानूनी मार्गदर्शन
- Adjudication orders में स्पष्ट रूप से भुगतान अवधि होनी चाहिए।
- यदि भुगतान न हो, तो ब्याज स्वतः 12% वार्षिक दर से लागू होगा।
- अलग मांग नोटिस की आवश्यकता नहीं, आदेश स्वयं कानूनी आधार बनता है।
- अनुपालन न करने से समय के साथ ब्याज बढ़ता रहेगा — न कि केवल पेनल्टी।
💡 ExpertVakil की सलाह:
🔸 SEBI पेनल्टी आदेश प्राप्त हों?
✅ तुरंत कानून अनुसार भुगतान करें, ताकि ब्याज का बोझ न बढ़े।
✅ अगर विवाद हो, तो ExpertVakil.in पर SEBI अधिवक्ताओं से संपर्क करें।
🎯 Shabdkosh में स्पष्ट शब्द:
| Legal शब्द | अर्थ |
|---|---|
| Adjudication Order | SEBI द्वारा दोषी को जारी किया गया फाइन-निर्धारण आदेश |
| Demand Notice | भुगतान का कानूनी नोटिस |
| Sec 28A | SEBI एक्ट में Recovery (revenue वसूली) की धारा |
| Sec 220 | आयकर अधिनियम में ब्याज वसूली की धारा |
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