निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत चेक अनादर पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया महत्वपूर्ण फैसले
सुप्रीम कोर्ट ने निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 (NI Act) के तहत चेक अनादर मामलों में कुछ हालिया अहम निर्णय दिए हैं, जो अधिकार क्षेत्र से लेकर वाद के कारण की उत्पत्ति व मामलों की शीघ्र सुनवाई तक, प्रमुख बिंदुओं को स्पष्ट करते हैं। अदालत ने निम्नलिखित फैसलों में स्पष्ट निर्देश और व्याख्याएं प्रस्तुत की हैं:
1. स्वतंत्र और गैर-कार्यकारी निदेशक की जवाबदेही
केएस मेहता बनाम मॉर्गन सिक्योरिटीज एंड क्रेडिट्स प्राइवेट लिमिटेड, 2025:
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि किसी कंपनी के गैर-कार्यकारी और स्वतंत्र निदेशक तब तक उत्तरदायी नहीं माने जायेंगे जब तक उनके वित्तीय लेनदेन में प्रत्यक्ष भागीदारी प्रमाणित न हो। केवल सक्रिय भागीदारी या कंपनी के संचालन की जिम्मेदारी वाले निदेशक ही दोषी माने जाएंगे।
2. IBC स्थगन के बाद वाद कारण
विष्णु मित्तल बनाम मेसर्स शक्ति ट्रेडिंग कंपनी, 2025:
अगर IBC के तहत स्थगन लागू हो जाता है और उसके बाद चेक अनादर का वाद-कारण उत्पन्न होता है तो निदेशक मंडल की शक्तियां निलंबित मानकर निदेशकों को उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता।
3. शिकायत का कारण कब उत्पन्न होता है
धारा 138 के तहत वाद का कारण माँग नोटिस के 15 दिन बाद भी राशि का भुगतान न होने पर उत्पन्न होता है, न कि केवल चेक अनादर पर।
4. क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र
प्रकाश चिमनलाल शेठ बनाम जागृति केयूर राजपोपट:
शिकायत उस मजिस्ट्रेट के समक्ष ही दाखिल होगी, जहां पर आदाता का बैंक अकाउंट है, न कि जहां चेक वसूली के लिए प्रस्तुत किया गया था।
5. मजिस्ट्रेट द्वारा समन जारी करने की प्रक्रिया
रेखा शरद उशीर बनाम सप्तश्रृंगी महिला नगरी सहकारी संस्था, 2025:
मजिस्ट्रेट को बिना शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत प्रमाण-पत्रों की पुष्टि के अभियुक्त को समन जारी नहीं करना चाहिए, विशेषकर जब शिकायत में महत्वपूर्ण तथ्य छुपाए गए हों।
6. पूर्व-संज्ञान समन की आवश्यकता नहीं
संजबीज तारी बनाम किशोर एस. बोरकर एवं अन्य, 2025:
धारा 138 के तहत चेक अनादर की शिकायतों के पूर्व-संज्ञान चरण में अभियुक्त को समन जारी करना आवश्यक नहीं है, जिससे मामलों में अनावश्यक विलंब ना हो।
7. 20,000 रुपये से अधिक के नकद ऋण पर शिकायत
अगर आयकर अधिनियम 1961 की धारा 269SS का उल्लंघन कर 20,000 रुपये से अधिक के नकद ऋण संबंधी चेक अनादर हुआ है, तब भी मामला एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत चलाया जा सकता है। इस तरह के मामले अप्रवर्तनीय नहीं माने जाते—सिर्फ आयकर दंड लागू होगा।
8. मांग नोटिस एवं चेक राशि में अंतर
कावेरी प्लास्टिक्स बनाम महदूम बावा बहरुदेन नूरुल, 2025:
डिमांड नोटिस में चेक की राशि का स्पष्ट उल्लेख अनिवार्य है; प्रत्याशित राशि या चेक राशि से भिन्न राशि का उल्लेख होने पर शिकायत अमान्य हो जाएगी।
इन हालिया निर्णयों से निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत चेक अनादर मामलों की प्रक्रिया, अधिकार क्षेत्र, निदेशकों की जिम्मेदारी और शीघ्र निपटारा संबंधी विधिक स्थिति और अधिक स्पष्टता के साथ सामने आई है।




















